Saturday, September 8, 2012
Friday, September 7, 2012
Thursday, September 6, 2012
आदत सी जो हो गयी है
धूप में चलते-चलते काले पड़ गए
वहां पहुँचने की आस में प्यास भूल गए
भूखे पेट तो कई रातें बिताई हैं
कुछ और पल रुकने में बुरा क्यों मानते
गिरते पड़ते दरवाज़े तक आ तो गए
लेकिन वहाँ बस एक ताला लटकता पाया
और क्या करते,वापस चल दिए
खोकर न पाने की आदत सी जो हो गयी है
Monday, August 27, 2012
Monday, May 14, 2012
Friday, May 4, 2012
Monday, April 30, 2012
मोहल्ले के नए डॉक्टर के लिए
अब आप बताएँ इस हाल में किया क्या जाए;
दिल में बसे दर्द को कैसे मिटाया जाए।
दोस्त बोलतें हैं हमें इश्क़ हुआ है।
ग़ालिब भी पूछ्तें हैं इस मर्ज़ की दवा,
वैद जी का कहना है- "पेट में है हवा!"
किस की सुनें मुझे समझ नहीं आता है,
हर कोई अपनी राय देकर चला जाता है।
अब शायद आप ही मेरी कुछ मदद कर पाएं;
क्या पता, आप मेरी पीड़ा को समझ पाएं।
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